गर्दन दर्द Description In Hindi

28
Feb

गर्दन दर्द Description In Hindi

गर्दन दर्द की समस्या एक आम समस्या होती है जो किसी भी व्यक्ति को हो सकती है। अगर यह एक आम समस्या है तब तो यह एक्सरसाइज और इलाज के आसान तरीकों से ठीक हो जाती है लेकिन कभी-कभी यह काफी परेशानियां भी खड़ी कर देती है। गर्दन में दर्द के साथ ही अकड़न और मांसपेशियों में खिंचाव भी महसूस होता है। कभी-कभी यह जल्दी ठीक हो जाती है लेकिन कुछ केस में काफी लंबे समय तक परेशान करती है। गर्दन हमारे शरीर का एक ऐसा हिस्सा है जिससे कि हमारे कंधे और रीढ़ की हड्डी जुड़ी होती है। ऐसे में अगर गर्दन में समस्या होती है तब हमें झुकने, दाएं, बाएं, ऊपर, नीचे देखने साथ ही वजन उठाने में भी तकलीफ महसूस होती है।

लक्षण

 

  • सिर दर्द होना।
  • सिर को एक मुद्रा में देर तक रखने में दर्द महसूस होना।
  • सिर को हिलाने में परेशानी होना।
  • मांसपेशियों में अकड़न होना।
  • गर्दन में गांठ बनना।
  • गर्दन को हिलाने डुलाने में तकलीफ होना।

कारण

 

  • गर्दन को गलत मुद्रा में रखना।
  • गलत तरीके से सोना या उठना।
  • गर्दन में चोट लगना।
  • हड्डियों का कमजोर हो जाना।
  • किसी तरह की बीमारी से पीड़ित होना।
  • गर्दन में झटका लगना।

इलाज

 

  • गर्दन में दर्द होने पर किसी पेन फिजीशियन को दिखाना चाहिए।
  • पेन फिजीशियन दर्द के सही कारण का पता लगाने में एक्सपर्ट होते हैं।
  • दर्द का सही कारण पता लगने के बाद ही पेन फिजीशियन उसका इलाज शुरू करते हैं।
  • मिनिमली इनवेसिव तकनीक द्वारा गर्दन के दर्द का इलाज किया जाता है।
  • इस तकनीक में बिना किसी चीर फाड़ के मरीज को दर्द से राहत दी जाती है।
  • मरीज की परेशानी को इस तकनीक द्वारा जड़ से खत्म कर दिया जाता है।
  • रक्त स्त्राव ना के बराबर होता है और मरीज को एक दिन में ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है।

 

पेन फिजिशियन किसी भी तरह के दर्द में सहायक होते हैं। पेन फिजिशियन द्वारा दर्द के सटीक कारण का पता लगाया जाता है उसके बाद ही इलाज शुरू किया जाता है। पहले दवाइयों के सेवन से ही मरीज को ठीक करने का प्रयास किया जाता है लेकिन अगर समस्या और ज्यादा बड़ी होती है तब मिनिमली इनवेसिव तकनीक द्वारा ट्रीटमेंट किया जाता है। इस तकनीक में बिना किसी चीर फाड़ के ट्रीटमेंट दिया जाता हैं और मरीज को एक दिन में ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। कुछ ही दिनों में मरीज अपनी सामान्य दिनचर्या में वापस लौट सकते हैं।