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घुटने के लिए पीआरपी घुटना खराब होना या घुटने में दर्दहोना या फिर अधिक वजन के कारण घुटने खराब होने की समस्या में सर्जरी कराना ही एकमात्र उपाय नहीं है। पीआरपी भी इस तरह की समस्या में लाभदायक हो सकता है। यह एक तरह का इंजेक्शन है, जिसे देने पर समस्या हल हो जाती है। जानिए क्या है, यह कैसे कार्य करती है:-

सबसे पहले प्रभावित क्षेत्र को सुन्न करने के लिए सामान्य एनेस्थेशिया दिया जाता है। फिर विशेष माइक्रोनीडिल की सहायता से पीआरपी को घुटने में प्रवेश कराया जाता है। इससे रक्त संचार की सक्रियता बढ़ जाती है और इसके स्टेम सेल्स ऊतकों की मरम्मत करते हैं, सूजन कम करतहैं और इस प्रकार ऑस्टियो अार्थराइटिस के लक्षण कम करते हैं। इस संपूर्ण प्रक्रिया में2-3 घंटे से ज्यादा समय नहीं लगता है और न ही अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरतपड़ती है। पीआरपी इलाज से दर्द, अकड़न और कार्यप्रणाली में बहुत सुधार आता है।चूंकि यह सिंथेटिक नहीं जैविक इंजेक्शन है, इसलिए मरीजों पर इसका प्रभाव अलग-अलग होता है। कई अध्ययन बताते हैं कि लगभग 73 प्रतिशत मामलों में कई क्लिनिकलऔर फंक्शनल फायदे देखे गए हैं और एक साल तक ऑर्थराइटिस के लक्षण कम होते है।

कितनी कारगर है: पीआरपी इंजेक्शन?

असर 4-6 हफ्ते बाद ही दिखता है, इसलिए मरीज को इस इंजेक्शन के तत्काल परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इंजेक्शन बहुत  किफायती है, क्योंकि इस पर होने वाला खर्च रिप्लेसमेंट सर्जरी के खर्च के दसवें हिस्सेके बराबर होता है। नी जल्दी हो सकेयह इलाज कराना ही बेहतर होता है ताकि अधिकतम और लंबी अवधि तक इसका लाभमिल सके।

कहां-कहां उपयोगी है:?
किसी भी टेंडन या लिगामेंट इंजरी का सफलतापूर्वक पीआरपी
थेरैपी के द्वारा उपचार संभव है, लेकिन पूरी तरह टूट चुके टेंडन या लिगामेंट्स का इसके द्वारा उपचार संभव नहीं है। स्पोर्ट्स पर्सन केलिए भी यह कारगर है। जिनके घुटनों की मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है। इस प्रकार की समस्याओं को आमतौर पर दवाअों,फिजियोथेरेपी या सर्जरी के द्वारा ठीक कियाजाता है। कईं एथलीट्स के अनुसार पीआरपी
थेरैपी उनकी समस्याओं को तुरंत और अधिक बेहतर तरीके से उपचार करती है।

mrs taylor 54 yrs old  को दोनों घुटनों और दाएं पैर में दर्द रहता था। उनका वजन भी ज्यादा थाऔर घुटनों तथा पैर में  स्टियोअार्थराइटिसथा। सहारे के बगैर चलना असंभव हो गया था काठी का सहारा लेना पड़ रहा था।नी कैप, पेनकिलर्स और कई सारे फिजियोथेरैपी व्यायाम सहित विभिन्न प्रकारकी चिकित्सा सहायता एवं इलाज कराने की कोशिश के बाद वे किसी वैकल्पिक इलाजके लिए डॉक्टरों के पास गईं, क्योंकि वे नी रिप्लेसमेंट सर्जरी नहीं कराना चाहती थीं।उनकी स्थिति को देखते हुए चिंता को ध्यान में रखते हुए उन्हें पीआरपी prp (प्लेटलेट रिच प्लाज्मा) इंजेक्शन लेने की सलाह दी। छह महीने तक इंजेक्शन लगवाने के बाद उनको बहुत आराम मिला, दर्द भी
काफी कम हो गया। उन्हें इतना आराम मिलने लगा था कि वह वॉकिंग एड या सहारे के बिना ही चलने लगी थीं। दर्द निवारक दवाओं पर निर्भरता धीरे-धीरे कम होने लगी।

क्या है पीआरपी थेरैपी:??
ये एक थेरैपी है जिसे प्लैटलेट्स-रिच प्लाज्मा थेरैपी के नाम से जाना जाता है इस प्रक्रिया में जिस व्यक्ति का उपचार किया जा रहा है उसी का रक्त लिया जाता है। इसमें एक प्रक्रिया के जरिये प्लेटलेट्स के साथ प्लाज्मा ट्यूब में एकत्र कराए जाते हैं। यह प्लाज्मा, जिसमें प्लेटलेट्स
और growth factors[ग्रोथ फेक्टर्स] की मात्रा अधिक होती है, ऊतकों के पुनर्निर्माण और क्षतिग्रस्त ऊतकों (टिश्यूज़) को ठीक करने में काफी उपयोगी होता है। पीआरपी में सामान्य रक्त की तुलना में 5 गुना अधिक प्लाज्मा होता है।इस थेरैपी का आधार यह है कि प्लेटलेट्स घावों के भरने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।एक बार में 20 मिलीलीटर रक्त लिया जाताहै। इससे प्लेटलेट्स को अलग करने के बाद इसमें एक्टिवेटर मिलाए जाते हैं, जो प्लेटलेट्स को एक्टिवेट कर देते हैं ताकि जहां क्षति हुई है वहां यह बेहतर तरीके से कार्य कर सके।

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